पोषण भी, पढ़ाई भी : आंगनवाड़ी केंद्रों में समग्र विकास की नई दिशा

भोपाल
बाल्यावस्था केवल खेल-कूद और मस्ती का समय नहीं है, बल्कि यह जीवन की आधारशिला रखने वाला महत्वपूर्ण दौर भी है। गर्भधारण से लेकर छह वर्ष की आयु तक का समय बच्चे के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास के लिए बेहद अहम होता है। विशेष रूप से पहले 1000 दिन, गर्भ के नौ महीने और जन्म के बाद के दो साल, बच्चे के भविष्य की नींव मजबूत करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इस दौरान सही पोषण के साथ-साथ संज्ञानात्मक विकास के अवसर भी उतने ही आवश्यक होते हैं। संयुक्त परिवारों की घटती संख्या और बदलते सामाजिक परिवेश के कारण अब घर में बच्चों को पारंपरिक रूप से मिलने वाला सहज शिक्षण प्रभावित हो रहा है। इसी कमी को पूरा करने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाया जा रहा है, जहां गर्भवती महिलाओं, शिशुवती माताओं और छह वर्ष तक के बच्चों को पोषण आहार के साथ-साथ प्रारंभिक शिक्षा दी जाती है।

समाज की भागीदारी से होगा बच्चों का भविष्य उज्जवल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिये न सिर्फ माता-पिता की बल्कि समाज की भागीदारी भी आवश्यक है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सक्षम आंगनवाड़ी की "पोषण भी, पढ़ाई भी" अभियान की शुरूआत 10 मई 2023 को की गई थी। इसका उद्देश्य प्रारंभिक बाल्यवस्था में देखभाल और शिक्षा पर आंगनवाड़ी प्रणाली का ध्यान केन्द्रित करना है। साथ ही आंगनवाड़ी केन्द्र को उच्च गुणवत्ता वाली बुनियादी सुविधाओं खेल के उपकरण और विधिवत प्रशिक्षित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ एक शिक्षण केन्द्र में परिवर्तित करना भी इसका उद्देश्य है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव मानते है कि अच्छा पोषण न केवल शारीरिक वृद्धि बल्कि मानसिक विकास और सीखने की क्षमता को भी बढ़ावा देता है। “पोषण भी, पढ़ाई भी” कार्यक्रम के माध्यम से महिला एवं बाल विकास विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि हमारे नौनिहालों को एक सकारात्मक, स्वच्छ वातावरण मिले, जहाँ वे सीखने और बढ़ने के लिए प्रेरित हों। यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए मिलकर प्रयास करें। यदि हम बचपन में ही बच्चों को सही पोषण और सीखने के पर्याप्त अवसर दें, तो न केवल उनके स्वास्थ्य बल्कि उनके उज्जवल भविष्य की नींव मजबूत कर सकते हैं। पोषण भी पढ़ाई भी एक ऐसा अभियान है जिसके साथ जुड़ कर हम अपनी भावी पीढ़ियों को सशक्त बना सकते है और एक स्वस्थ, शिक्षित समाज का निर्माण करने में अहम भूमिका निभा सकते है ।

‘पोषण भी, पढ़ाई भी’ कार्यक्रम : समग्र विकास की पहल
भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया “पोषण भी, पढ़ाई भी” कार्यक्रम, बच्चों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए प्रारंभिक शिक्षा को पोषण से जोड़ता है। इस कार्यक्रम के तहत, आंगनवाड़ी केंद्रों में तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को स्कूल पूर्व शिक्षा दी जा रही है, जिससे वे प्राथमिक विद्यालय में औपचारिक शिक्षा के लिए तैयार हो सकें। इसके अलावा, पहली बार तीन वर्ष से छोटे बच्चों की देखभाल और संभावित दिव्यांगता की पहचान के लिए विशेष गतिविधियाँ तय की गई हैं।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है ताकि वे विकास में देरी या संभावित विकलांगता के संकेतों की पहचान कर सकें। इससे ऐसे बच्चों के शीघ्र उपचार और सही देखभाल की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। कई बार बच्चों में विकास संबंधी समस्याएँ तुरंत स्पष्ट नहीं होतीं, जैसे कि श्रवण या दृश्य बाधाएँ, बोलने में देरी, डाउन सिंड्रोम, या सेरेब्रल पाल्सी। इनका समय पर पता लगाने से आगे चलकर गंभीर दिक्कतों से बचा जा सकता है।

मध्यप्रदेश में कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन
मध्यप्रदेश इस कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल विकास संस्थान (निपसिड) के विशेषज्ञों द्वारा 2,758 परियोजना अधिकारियों और पर्यवेक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया, जो अब प्रदेश की 95,253 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित कर रहे हैं। अब तक 93,454 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।

कार्यक्रम की प्रभावी निगरानी के लिए जिला कलेक्टरों और राज्य स्तरीय अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। मार्च 2025 में दो चरणों में आयोजित इस प्रशिक्षण के दौरान ऑनलाइन उपस्थिति पंजीयन की व्यवस्था की गई, जिससे वास्तविक आंकड़े प्राप्त किए जा सके।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button